Thursday, December 27, 2018

अमेरिका के कोलिन ने बिना मदद अकेले अंटार्कटिका पार किया, ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति

अमेरिका के कॉलिन ओ'ब्रेडी (33) अंटार्कटिका महाद्वीप को अकेले और बिना किसी की मदद के पार करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने उत्तर से दक्षिण अंटार्कटिका तक 1600 किमी की दूरी 54 दिन में पार की। 

मैंने अपना लक्ष्य पूरा किया
कोलिन ओ'ब्रेडी ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "वे 32 घंटे मेरी जिंदगी के सबसे चुनौतीपूर्ण रहे। इस दौरान मैंने बेहतरीन पलों को जिया। मैं हमेशा लक्ष्य पर निगाहें टिकाए रहा। मैं यह सब इसलिए लिख पाया क्योंकि अभी तक सोया नहीं।'' ब्रेडी के अभियान पर जीपीएस से नजर रखी जा रही थी।

ओ'ब्रेडी और ब्रिटेन के कैप्टन लुई रड (49) ने 3 नवंबर को अलग-अलग यूनियन ग्लेशियर से अंटार्कटिका की यात्रा शुरू की थी। 1996-97 में नॉर्वे के बोर्ग ऑसलैंड पहली बार अकेले अंटार्कटिका पार करने वाले व्यक्ति बने थे लेकिन उन्होंने हवा की दिशा की जानकारी के लिए पतंगों की मदद ली थी।

180 किलो सामान साथ था
ओ'ब्रेडी ने करीब 180 किलो सामान खींचा। वह दक्षिण ध्रुव पर 12 दिसंबर (यात्रा के 40वें दिन) को पहुंच गए थे। प्रशांत महासागर में स्थित फिनिशिंग पॉइंट रॉस आइस शेल्फ पर वह 26 दिसंबर को पहुंचे। रड उनसे दो दिन पीछे चल रहे हैं।

नाश्ता करते हुए तय किया कि बाकी दूरी एक बार में तय कर लूंगा
इंस्टाग्राम पर ओ'ब्रेडी लिखते हैं, ‘‘जैसे ही मैंने नाश्ता किया, दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था कि क्या मैं बाकी बचा रास्ता एक ही बार तय कर पाऊंगा? इसके बाद मैंने अपने जूते बांधे और असंभव को जीतने (124 किमी की बची दूरी) निकल पड़ा।’’

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ओ'ब्रेडी के अभियान को ध्रुवीय जीत के इतिहास में सबसे उल्लेखनीय बताया। लिखा, ‘‘अंतिम 124 किमी की दूरी एक बार में तय करना आसान नहीं था, वह भी तब जब व्यक्ति (ओ'ब्रेडी) 53 दिन में हजारों किमी की दूरी तय कर चुका हो। उन्होंने अपने लिए ऐसा लक्ष्य तय किया, जिसे अक्सर लोग बीच में ही छोड़ देते हैं।’’

अंटार्कटिका पर सबसे पहले नॉर्वे के रोआल्ड एमंडसेन और उनके बाद ब्रिटेन के रॉबर्ट फाल्कन स्कॉट पहुंचे थे। 2016 में ब्रिटिश आर्मी अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल हेनरी वॉर्स्ले भी अकेले दक्षिण ध्रुव पार करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उनकी मौत हो गई।

Tuesday, December 18, 2018

प्यार में पहल करने में महिलाओं की मदद करेगा ये ऐप

बदलते दौर में प्यार करने की परिभाषाएं बदल रही हैं और प्यार के इजहार की वह परंपरा भी टूट रही है, जिसमें प्यार में इजहार करने का झंडा सिर्फ पुरुष थामे रखता है. महिलाओं में ऑनलाइन प्यार तलाशने का चलन बढ़ा है, मुखर हो रहीं महिलाएं आगे बढ़कर पुरुषों से प्यार का इजहार करने से भी नहीं हिचकिचा रही हैं.

कुछ बरस पहले तक ऑनलाइन डेटिंग करने वालों को हिकारत भरी नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब यह एक ट्रेंड बन गया है. एक अनुमान के मुताबिक, अब हर पांच में से एक रिलेशनशिप ऑनलाइन शुरू हो रहा है, यह वजह है कि ऑनलाइन डेटिंग एप्स की बाढ़ आ गई है. अमेरिका और यूरोप में स्टैब्लिश कई बड़ी डेटिंग कंपनियां भारत में कारोबार खड़ा कर रही हैं. इसी में से एक है, 'बम्बल' जिसमें हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने भी निवेश किया है.

'बम्बल' डेटिंग एप को महिला प्रधान एप कहा जा रहा है, जिसकी अपनी वजहें हैं. इसका जवाब देते हुए इसकी को-फाउंडर व्हाइटनी वोल्फ कहती हैं, "ऑनलाइन डेटिंग को लेकर खासतौर पर महिलाओं में हमेशा से थोड़ा-सा संशय रहता है. इसलिए भारत में महिला सशक्तीकरण के मोटो के साथ एप को लॉन्च किया गया है."

दुनियाभर में 'बम्बल' का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 4.5 करोड़ से अधिक है.

डेटिंग एप अब किस तरह महिला प्रधान हो रहे हैं? इसका जवाब देते हुए नारीवादी गीता यथार्थ कहती हैं, "बम्बल ने डेटिंग एप के क्षेत्र में क्रांति ला दी है. इस डेटिंग एप में महिलाओं की सुरक्षा और कंफर्ट को ध्यान में रखकर कई बेहतरीन फीचर्स तैयार किए गए हैं. मसलन, इस एप पर महिलाएं ही सबसे पहले पहल कर सकती हैं. अगर किसी लड़के को किसी लड़की की प्रोफाइल पसंद भी आ गई तो वह उसे मैसेज नहीं कर पाएगा. फोटो डाउनलोड नहीं कर पाएगा, किसी तरह की ऑनलाइन स्टॉकिंग तो भूल ही जाइए."

वह कहती हैं, "बम्बल की तरह अब कई और महिला प्रधान डेटिंग एप शुरू हो सकते हैं, क्योंकि अब भारतीय महिलाएं संकोच के आवरण से बाहर निकलकर हर चीजों में हाथ आजमा रही हैं."

ऑनलाइन डेटिंग का यह फैशन पश्चिमी देशों से होता हुआ भारत पहुंचा है. सबसे पहला डेटिंग एप 1995 में शुरू हुआ, जिसका नाम 'मैच डॉट कॉम' था. इसके बाद 2000 में 'ईहार्मनी' और 2002 में 'एश्ले मैडिसन' शुरू हुआ, जिन्होंने ऑनलाइन डेटिंग का शुरुआती क्रेज शुरू किया. साल 2012 में 'टिंडर' लॉन्च हुआ, जो पहला डेटिंग एप था, जिसमें स्वाइप की सुविधा थी.

मार्च, 2014 तक टिंडर पर दुनियाभर में रोजाना की दर से एक अरब जोड़ों के मैच हो रहे थे. साल 2014 में ही टिंडर की को-फाउंडर व्हाइटनी वोल्फ ने बम्बल शुरू किया, जो महिला प्रधान डेटिंग एप है. 1990 के दशक में ऑनलाइन डेटिंग एक स्टिग्मा था लेकिन अब एक-तिहाई शादियां ऑनलाइन ही हो रही हैं.

'बम्बल' ने अपनी वेबसाइट पर टैगलाइन लिखी है, "बंबल पर महिलाएं पहले कदम बढ़ाती हैं. हम आपके लिए मैदान तैयार कर रहे हैं और डेटिंग के तरीके बदल रहे हैं. हमारा मानना है कि रिश्तों की शुरुआत सम्मान और समानता के साथ होनी चाहिए."

'वू डेटिंग' एप द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, इस तरह की ऑनलाइन डेटिंग एप पर महिलाओं और पुरुषों के बीच लैंगिक भेदभाव बहुत ज्यादा है. 'क्वाट्र्ज इंडिया' के मुताबिक, 20,000 शहरी लोगों पर किए गए सर्वे से पता चलता है कि भारत में डेटिंग एप पर महिलाओं की तुलना में पुरुष तीन गुना अधिक है.

Tuesday, December 11, 2018

इंटरनेट से अछूते दुनिया के आखिरी देश क्यूबा में 3G शुरू

अफ्रीकन देश क्यूबा के नागरिकों को अब इंटरनेट सुविधा मिल गई है। गुरुवार से यहां सभी नागरिकों के लिए पहली बार 3G इंटरनेट सेवा शुरू कर दी गई। यह दुनिया का आखिरी देश है, जहां इंटरनेट सर्विस शुरू हुई। क्यूबा की टेलीकॉम कंपनी ETECSA ने यह सर्विस शुरू की है। हालांकि, यहां पहले भी इंटरनेट था, लेकिन इसका इस्तेमाल सभी लोग नहीं कर पाते थे।

4 जीबी डेटा की कीमत 2100 रुपए, इतनी ही मजूदरी मिलती है
क्यूबा में इंटरनेट सर्विस शुरू करने वाली टेलीकॉम कंपनी ने इसके प्लान भी जारी कर दिए। इसके मुताबिक, क्यूबा के नागरिकों को हर महीने का प्लान 30 डॉलर (करीब 2100 रुपए) में मिलेगा, जिसमें सिर्फ 4 जीबी 3G डेटा का ही इस्तेमाल कर सकेंगे।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा की आबादी 1.12 करोड़ है। इनमें से भी सिर्फ 50 लाख लोग ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। यहां के ज्यादातर लोग मजदूरी करके ही अपना गुजारा करते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा में महीने की औसतन मजदूरी ही 30 डॉलर है जबकि कई श्रमिकों को तो इससे भी कम मजदूरी मिलती है। लिहाजा, इंटरनेट के लिए ये कीमत यहां के लोगों के लिए ज्यादा हो सकती है।

अभी तक वाई-फाई और इंटरनेट कैफे के भरोसे थे लोग
ऐसा नहीं है कि यहां पहली बार इंटरनेट आया है। इससे पहले भी यहां इंटरनेट था, लेकिन हर कोई इसका इस्तेमाल नहीं कर पाता था। 2013 तक यहां पर इंटरनेट सिर्फ महंगे होटलों में ही था ताकि बाहर से आने वाले पर्यटक इसका इस्तेमाल कर सकें।

इसके बाद 2017 में यहां पर इंटरनेट के लिए देशभर में वाई-फाई हॉटस्पॉट और इंटरनेट कैफे शुरू किए गए। अभी क्यूबा में देशभर में 1200 वाई-फाई हॉटस्पॉट हैं, जिसका इस्तेमाल सिर्फ 20 लाख लोग ही कर पाते हैं।

यहां पर तकरीबन 670 इंटरनेट कैफे हैं जहां एक घंटे इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए एक डॉलर (करीब 70 रुपए) देना होता है।

भारत में 3 रुपए में 1 जीबी डेटा, क्यूबा में 525 रुपए में
भारत में 4G इंटरनेट सर्विस आ चुका है और 5G को लेकर भी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं, लेकिन क्यूबा में फिलहाल 3G कनेक्टिविटी ही आई है।

क्यूबा में हर महीने 4 जीबी डेटा के लिए 2100 रुपए का खर्च करना होगा, यानी एक जीबी डेटा के लिए करीब 525 रुपए।

भारत में जियो की तरफ से 399 रुपए में 126 जीबी 4G डेटा, 84 दिनों के लिए मिलता है। इस हिसाब से एक दिन में 1.5 जीबी डेटा के लिए 4.75 रुपए खर्च करने होते हैं जबकि एक जीबी डेटा की कीमत सिर्फ 3 रुपए के आसपास आती है।

भारत में जियो 4 जीबी 4G डेटा सिर्फ 12 रुपए में देता है जबकि क्यूबा में इतने ही 3G डेटा के लिए 2100 रुपए खर्च करने होते हैं जो भारत की 4G सर्विस की कीमत से भी 175 गुना महंगा है।