Monday, November 12, 2018

बीजेपी राज में अयोध्या बने फ़ैज़ाबाद का इतिहास

बिना भेद-भाव का काम करने का डंका पीटने वाली उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फ़ैज़ाबाद ज़िले का नाम बदलकर 'अयोध्या' कर दिया है. इस प्रकार फ़ैज़ाबाद जो अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए जाना जाता था अतीत में चला गया है.

फ़ैज़ाबाद नवाबों द्वारा बसाया गया शहर था. यह अवध के नवाबों की पहली राजधानी थी जिसमें अयोध्या की भी अपनी शानो-शौक़त थी. दोनों शहर दो संस्कृतियों, स्थापत्य कला, साहित्य, संगीत, परम्परा को समेटे हुए जी रहे थे. किसी को किसी से न कोई शिक़वा थी, न शिकायत. दोनों शहरों की अपनी कहानी थी, अपनी ज़ुबानी थी.

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्ज़िद जैसी स्थानीय समस्या के अन्तरराष्ट्रीय बन जाने के बावजूद साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में इन दोनों नगरों की गिनती थी. इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो प्यार मोहब्बत की मिसाल रहे हैं ये शहर.

फ़ैज़ाबाद, राजनीति चिन्तक एवं विचारक आचार्य नरेन्द्र देव और डॉक्टर राममनोहर लोहिया की भूमि रही है. साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर कुंवर नारायण, साहित्यकार और आलोचक डॉक्टर विजय बहादुर सिंह, हिन्दी उर्दू के विद्वान अनवर जलालपुरी, कविता के हस्ताक्षर शलभ श्रीराम सिंह, संगीत और कला के क्षेत्र में ठुमरी गायिका बेग़म अख़्तर, पखावज का अवधी घराना स्थापित करने वाले बाबा पागलदास, उर्दू के शायर मीर अनीस, मीर गुलाम हसन, ख़्वाजा हैदर अली आतिश, पंडित ब्रजनारायण चकबस्त, मजाज़ लखनवी, मेराज़ फ़ैज़ाबादी आदि कितने ही नाम लिए जाएं जो फ़ैज़ाबाद की ही धरोहर हैं. खेल के क्षेत्र में अन्तरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ अखिल कुमार भी इसी फ़ैज़ाबाद की धरती पर पैदा हुए.

1857 की क्रांति के दूत मंगल पाण्डेय फ़ैज़ाबाद के थे. बाबा रामचन्द्र का किसान आन्दोलन यहीं शुरू हुआ था. मौलवी अहमदउल्ला शाह उर्फ़ डंका शाह ने अवध के विलय के बाद भी फै़ज़ाबाद को आज़ाद रखा था. देश की आज़ादी के लिए काकोरी केस के अशफ़ाक़ उल्ला खां की शहादत फै़ज़ाबाद जेल में हुई, जहां फांसी के दिन प्रतिवर्ष 19 दिसम्बर को एक बड़ा जलसा होता है.

पत्रकारिता की दुनिया में पत्रकारों एवं कर्मचारियों की सहकारिता के आधार पर फै़ज़ाबाद में एक नया प्रयोग जनमोर्चा 1958 में आरम्भ हुआ था, जो आज भी संचालित हो रहा है जिसके मुख्य संस्थापक महात्मा हरगोविन्द थे.

योगी आदित्यनाथ ने फ़ैज़ाबाद का नाम अयोध्या किया
फै़ज़ाबाद का इतिहास

दिल्ली के शहंशाह के दरबार से अवध का सूबेदार नियुक्त होने के बाद नवाब सआदत अली खां (शासनकाल 1722-1739) ने अयोध्या में ही अपना आशियाना बनाया, जहां से वे शासन प्रबन्ध करते थे.

यह आशियाना सरयू नदी के तट पर और टीलेनुमा ऊंचाई पर था जिसे 'किला मुबारक' के नाम से जाना जाता था. उन्होंने अयोध्या के बाहरी इलाक़े में नदी के किनारे एक कच्ची मिट्टी की दीवार की किलेनुमा घेरेबन्दी का अहाता अपने सैनिकों के लिए बनवाया जहां वे स्वयं भी रहने लगे.

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